बरखेड़ा। क्षेत्र के गाजीपुर मुगल स्थित शिव मंदिर प्रांगण में चल रहे सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। संगीतमय भजनों के बीच व्यास गद्दी पर आसीन कथावाचक अनुपम शास्त्री ने शिव विवाह का अत्यंत भावपूर्ण और सजीव वर्णन किया, इससे पूरा कथा पंडाल भक्तिमय हो गया।
कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए व्यास जी ने बताया कि दक्ष यज्ञ में अपमान के बाद माता सती ने योगाग्नि से शरीर त्याग किया और अगले जन्म में राजा हिमालय के यहां पार्वती के रूप में जन्म लिया। भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए माता पार्वती ने कठोर तपस्या की, जिससे तीनों लोक डगमगा गए। देवताओं के अनुरोध पर शिव जी ने सुंदर रूप धारण किया और हिमालय के प्रांगण में विधि-विधान के साथ माता पार्वती से विवाह संपन्न हुआ। कथा के समापन पर भव्य आरती हुई, जिसके उपरांत पंडाल में मौजूद सैकड़ों भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इस धार्मिक आयोजन को सफल बनाने में गांव के राजपाल, आंगन लाल, नरपत लाल, माखन लाल और नंदराम सहित कई ग्रामीणों का विशेष सहयोग रहा। संवाद

