झूंसी में शांतनु दुबे रात में घर से निकला था लेकिन फिर लौटकर नहीं आया। अगले दिन उसकी हत्या की खबर ने परिवार को तोड़कर रख दिया। इस घटना ने रात में दोस्तों के साथ घूमने, किसी काम से निकलने या नाइट लाइफ एक्सप्लोर करने वाले किशोरों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नाइट लाइफ का मतलब जिंदगी को खतरे में डालना या जिंदगी खो देना नहीं है।

बदलती जीवनशैली में किशोरों को आजादी देना जरूरी है लेकिन इसके साथ उन्हें रात में सुरक्षित तरीके से बाहर निकलने, अनजान लोगों और परिस्थितियों से सावधान रहने और खतरे को पहचानने की समझ देना भी उतना ही जरूरी है।
शहर में कंपनी बाग, स्टेशन रोड, कटरा, सिविल लाइंस, तेलियरगंज, चौक, अलोपीबाग, दारागंज, धूमनगंज समेत कई प्रमुख इलाकों में देर रात तक खानपान की दुकानें और क्लब-बार की गतिविधियां चलती रहती हैं।
