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महाराजपुर थाना
– फोटो : अमर उजाला
कानपुर के महाराजपुर थाने में वर्ष 1991 की फर्जी पुलिस मुठभेड़ के मामले में 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। आरोप है कि तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी और उनकी टीम ने राकेश पाठक समेत 12 लोगों को झूठी मुठभेड़ दिखाकर गिरफ्तार किया। अवैध असलहों की बरामदगी दर्शाई और उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे दर्ज कराए। मामले की जांच सीआईडी की अपराध शाखा ने की थी। नामजद 18 पुलिसकर्मियों में छह की मृत्यु हो चुकी है, जबकि शेष 12 के खिलाफ गंभीर आठ धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
चकेरी के गांधीग्राम निवासी देव प्रसाद पाठक ने शासन से शिकायत की थी कि मुफ्त में प्लॉट न देने पर तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी ने उनके छोटे भाई राकेश पाठक समेत 12 लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाया। शासन ने 11 फरवरी 1991 को जांच सीआईडी की अपराध शाखा, कानपुर खंड को सौंपी थी।तत्कालीन निरीक्षक आरपी सिंह की जांच रिपोर्ट 25 सितंबर 1995 को सीआईडी मुख्यालय, लखनऊ से अनुमोदित हुई। जांच में पुलिस की ओर से दर्ज मुकदमों और मुठभेड़ की कहानी फर्जी पाई गई।