हाईकोर्ट:बस को दुरुस्त कराकर चलने योग्य बनाएं फिर मालिक को सौंपें, जब्त वाहन के सामान चोरी होने पर कोर्ट सख्त – Repair The Bus To Make It Roadworthy Before Handing It Back To The Owner
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कोर्ट का आदेश।
– फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जब्त की गई बस की खराब हालत और उसमें सामान चोरी होने के मामले को गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे तीन सप्ताह के भीतर बस को दुरुस्त कराकर चलने योग्य बनाएं। इसके बाद फिटनेस प्रमाणपत्र के लिए पंजीकरण प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करें और प्रमाणपत्र जारी होने पर उसे मालिक को सौंप दें। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने प्रयागराज के अब्दुल राशिद खान की याचिका पर दी है।
याची ने याचिका दाखिल कर बस की अवैध जब्ती को निरस्त करने और जब्त बस को सुरक्षित व चलने योग्य स्थिति में वापस देने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि बस जब्त होने के बाद अधिकारियों की अभिरक्षा में थी। निरीक्षण के दौरान उसमें दरवाजों के लॉक, बैटरी और कुछ स्लीपर सीटों के गद्दे गायब मिले। याची के अधिवक्ता ने यह भी बताया कि पहले बस के टायर गायब थे जिन्हें बाद में बदल दिया गया।
कोर्ट ने पाया कि बस जब्त करने के समय जारी चालान में जब्ती का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं बताया गया। अधिकारियों ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 का हवाला दिया लेकिन वाहन की सुरक्षित अभिरक्षा के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। कोर्ट ने दोनों चालानों को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने बस जब्त करने वाले कर्मचारियों की पहचान, उनके खिलाफ की गई कार्रवाई और बस की मरम्मत पर हुए खर्च का ब्योरा भी मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।
