पीलीभीत में जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने संकट में घिरे बच्चों की मदद के लिए एक बेहद संवेदनशील और त्वरित कदम उठाया है। राजपुर महराजपुर गाँव का एक 14 वर्षीय बालक अपनी 7 और 9 साल की छोटी बहनों के साथ मदद की आस में जिलाधिकारी कार्यालय पहुँचा। बच्चों के माता-पिता की मृत्यु हो चुकी थी और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तुरंत जिला प्रोबेशन अधिकारी को बुलाकर मदद के निर्देश दिए। उन्होंने बच्चों को बिस्कुट, चॉकलेट, पानी की बोतल और आर्थिक सहायता देने के साथ ही उपजिलाधिकारी कलीनगर और बीडीओ पूरनपुर को तत्काल उनके घर जाने के निर्देश जारी किए।

अधिकारियों की टीम जब बच्चों को लेकर उनके गाँव के पंचायत भवन पहुँची, तो वहाँ उपजिलाधिकारी, बीडीओ और बड़ी संख्या में ग्रामवासी मौजूद रहे। प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए बच्चों के माता-पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र तुरंत जारी कर उन्हें राशन उपलब्ध कराया। साथ ही, बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है और उन्हें जल्द ही मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जोड़ा जाएगा। इसी दौरान गाँव में दो अन्य ऐसे बच्चे भी मिले जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया था, प्रशासन ने तुरंत उनके भी बाल सेवा योजना के आवेदन ऑनलाइन करवा दिए।
संवेदनशीलता का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। शाम को जिलाधिकारी खुद चिड़ियादाह निवासी श्रीमती ताराबेगम के घर पहुँचे। ताराबेगम के पति और बेटे की मृत्यु हो चुकी है, और बहू अपने दो छोटे बच्चों को छोड़कर कहीं चली गई है। जिलाधिकारी ने उनके पति और बेटे का मृत्यु प्रमाण पत्र मौके पर ही जारी करवाया और जल्द से जल्द आय प्रमाण पत्र बनाने के निर्देश दिए ताकि उनकी पेंशन शुरू हो सके। उन्होंने ताराबेगम को अपनी ओर से आर्थिक सहायता दी, राशन की व्यवस्था कराई और दोनों छोटे बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जोड़ने का भरोसा दिया। इस दौरान उपजिलाधिकारी पीलीभीत और खंड विकास अधिकारी मरौरी सहित तमाम अधिकारी मौजूद रहे
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