इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद में एक न्यायिक मजिस्ट्रेट की ओर से पत्नी व उसके दो परिजनों के खिलाफ दर्ज कराई गई प्राथमिकी रद्द कर दी। यह आदेश पत्नी की याचिका पर न्यायमूर्ति राजीव मिश्रा और न्यायमूर्ति डॉ.अजय कुमार-द्वितीय की खंडपीठ ने दिया है। गौतमबुद्ध नगर निवासी पत्नी के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट ने नॉलेज पार्क ग्रेटर नोएडा थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी व अन्य आरोप लगाए थे। याची ने दर्ज प्राथमिकी की कार्यवाही रद्द करने की मांग में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि पति-पत्नी के बीच का यह वैवाहिक विवाद था, जिसे जानबूझकर आपराधिक मुकदमे का रूप दिया गया। कथित घटना के लगभग दो महीने बाद मामला दर्ज कराया गया। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता ने तलाक का मुकदमा दायर किया था, जिसमें सितंबर 2025 में तलाक मंजूर हो चुका था। इसके बावजूद जनवरी 2026 में दर्ज कराई गई एफआईआर में इस महत्वपूर्ण तथ्य को छिपा दिया गया। साथ ही एफआईआर में यह आरोप भी लगाया गया था कि पत्नी तलाक के एवज में एक करोड़ रुपये की मांग कर रही थी। कोर्ट ने पाया कि एफआईआर दर्ज होने से काफी पहले ही तलाक की डिक्री पारित हो चुकी थी। इससे एफआईआर के आरोप तथ्यों के विपरीत साबित हुए।

