शहर के ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदुओं की बढ़ती चहल कदमी को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीण इलाकों की सीमा पर पांच पिंजरे लगाने का निर्णय लिया है। ऐसे में इन पिंजरों का कहां-कहां रखा जाना है, इसके लिए काम शुरू कर दिया गया है। अभी तक वन विभाग की तरफ से झूंसी के हरीश चंद्र मिशन इनइंस्टिट्यूट में एक पिंजरा लगाय गया। मगर अब इस पिंजरे को यहां से हटाने की तैयारी है। ऐसे में चार अन्य पिंजरे भी लगाने की योजना बन चुकी है। इन पिंजरों में तेंदुआ के लिए बकरे का मांस रखा जाएगा। इसके अलावा गतिविधियों पर नजर रखने के लिए पिंजरे के आसपास कैमरे भी लगाए जाएंगे।
अगर देखा जाए तो बाढ़ के समय तेंदुओं की चहलकदमी गंगा के तटीय इलाकों में अधिक देखने को मिलती है। पिछले एक साल के भीतर गंगा के तटीय इलाकों से सटे गांव कोटवा, कतवारूपुर व घनइचा के आसपास तेंदुआ देखने को मिला था। ऐसे में इन इलाकों कके आसपास पिंजरा लगाने की पूरी संभावना है। वहीं मिर्जापुर मार्ग से सटे तटीय इलाकों में भी पिंजरों को सुरक्षा के तौर पर लगाया जा सकता है। बता दें कि सरायइनायत के कतवारूपुर गांव में मंगलवार की रात तेंदुआ देखा गया था। जिसके बाद वन विभाग की टीम ने तेंदुआ के पैरों के निशान के आधार पर खोजबीन शुरू कर दी है। इसके अलावा ग्रामीणों को सावधान रहने की भी सलाह दी गई है।

