प्रयागराज प्रतियोगी छात्रों का गढ़ है। आशंका है कि नशे के सौदागरों के निशाने पर युवा हैं। एक बार इस खतरनाक नशे की लत लगने के बाद लोग इससे उबर नहीं पाते। धीरे-धीरे इसकी चेन बनती जाती है। पंजाब के युवा इस जानलेवा लत के जीते-जागते उदाहरण हैं। प्रयागराज के मांडा में एमडी ड्रग की फैक्टरी मिलना काली कमाई के लिए युवा नशों में जहर घोलने की बड़ी साजिश माना जा रहा है। ऐसे में पुलिस के सामने युवाओं को इस लत से बचाने की बड़ी चुनौती है। पुलिस नशे की सप्लाई का नेटवर्क खंगालने में जुटी है। जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि एमडी आसपास के किन-किन जिलों में भेजी जा रही थी। हाल में प्रतापगढ़ में एमडी बरामद होने के बाद पुलिस इस एंगल की भी तफ्तीश कर रही है। सप्लाई हो रही थी तो ऑपरेट कौन करता था, खरीदार कौन थे?
गांजा और स्मैक की सबसे ज्यादा बरामदगी
प्रयागराज में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और स्थानीय पुलिस की कार्रवाई में अभी तक गांजा और स्मैक की बरामदगी लगातार सामने आती रही है। गांजा और स्मैक की बड़ी खेप पकड़ी गई हैं। जून 2026 में एएनटीएफ और एयरपोर्ट पुलिस की संयुक्त टीम ने 700 ग्राम स्मैक बरामद की थी। सितंबर 2025 में 102 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया था। जून 2026 में प्रयागराज एसटीएफ की फील्ड यूनिट ने 439 किलोग्राम गांजा पकड़ा था। अब एमडी की फैक्टरी पकड़े जाने के बाद नशे के कारोबार का दायरा और बड़ा होने की आशंका है।

