भाजपा ने उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव में आठ प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। इनमें बरेली के आंवला से पांच बार के विधायक और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह भी शामिल हैं। 16 अक्तूबर को प्रस्तावित चुनाव के लिए भाजपा ने इस बार कई नए चेहरों के साथ संगठन और सरकार में सक्रिय नेताओं को भी मौका दिया है। धर्मपाल सिंह को मंत्री पद पर रहते राज्यसभा का प्रत्याशी बनाए जाने से बरेली-रुहेलखंड की राजनीति में इसके निहितार्थ तलाशे जाने लगे हैं।

धर्मपाल सिंह मौजूदा योगी सरकार में पशुधन एवं दुग्ध विकास, राजनीतिक पेंशन, अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज तथा नागरिक सुरक्षा विभाग संभाल रहे हैं। ऐसे में उनका राज्यसभा प्रत्याशी बनाया जाना सिर्फ विधानसभा से उच्च सदन की ओर बदलाव नहीं, बल्कि लंबे प्रशासनिक और विधायी अनुभव वाले नेता को राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका देने के फैसले के तौर पर भी देखा जा रहा है।
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मंत्री रहते राज्यसभा का टिकट, क्यों?
भाजपा ने धर्मपाल सिंह के चयन की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है। हालांकि राजनीतिक घटनाक्रम के आधार पर इसके कई संभावित पहलू हैं।
पहला, लंबा विधायकी अनुभव: धर्मपाल सिंह करीब तीन दशक से विधानसभा की राजनीति में सक्रिय हैं और आंवला से लगातार पांच बार विधायक रह चुके हैं। 1996 में पहली बार विधायक बनने के बाद 2002, 2012, 2017 और 2022 में भी उन्होंने जीत दर्ज की। 2012 से 2017 तक वह भाजपा विधानमंडल दल के उपनेता भी रहे।
