इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल से लौट रहे छात्र की मौत के मामले में प्रधानाचार्य के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज मुकदमे को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल पीड़ित के एससी/एसटी समुदाय से होने के आधार पर इस कानून के तहत अपराध नहीं बनता। इसके लिए अपराध का पीड़ित की जाति के कारण किया जाना भी आवश्यक है।
यह आदेश न्यायमूर्ति संतोष राय की एकल पीठ ने जौनपुर में तैनात प्रधानाचार्य रमाकांत यादव की आपराधिक अपील पर दिया। मामला जौनपुर के मीरागंज थाना क्षेत्र का है। नौ सितंबर 2023 को छात्र आयुष साइकिल से स्कूल गया था। दोपहर चार बजे उसके पिता हीरालाल सरोज को सूचना मिली कि उनका बेटा सीढ़ियों से गिरकर बेहोश हो गया है। मौके पर पहुंचने पर आयुष एक तख्त पर पड़ा मिला। उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।
पिता ने आशंका जताई थी कि उनके बेटे को करीब एक घंटे तक धूप में खड़ा रखा गया था। उन्होंने प्रधानाचार्य और स्कूल प्रबंधन की भूमिका पर संदेह जताते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने विवेचना के बाद एससी/एसटी एक्ट के तहत भी आरोपपत्र दाखिल कर दिया। इसके खिलाफ प्रधानाचार्य ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।