
🚨 पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा को पुलिस ने घसीटकर बस में बैठाया? वायरल वीडियो ने उठाए गंभीर सवाल!

📍 नई दिल्ली | 12 अक्टूबर 2026
जब पत्रकार सवाल पूछे, तो जवाब मिलेगा या हिरासत?
दिल्ली में प्रदर्शन की कवरेज कर रहीं पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा के साथ पुलिस की कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। वीडियो में कई महिला पुलिसकर्मी उन्हें पकड़कर बस में ले जाती दिखाई देती हैं। इस दौरान प्रज्ञा मिश्रा विरोध करती नजर आती हैं।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की पत्रकार प्रज्ञा मिश्रा 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रही थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेस पहचान-पत्र और माइक आईडी होने के बावजूद पुलिस ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें जबरन बस में बैठाया।
❓ पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
🔴 क्या पत्रकार को अपना काम करने का अधिकार नहीं?
🔴 यदि हिरासत जरूरी थी, तो उसकी वजह स्पष्ट क्यों नहीं की गई?
🔴 क्या पत्रकार की पहचान और उसके पेशेवर अधिकारों का सम्मान किया गया?
लोकतंत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन कार्रवाई का तरीका भी कानूनसम्मत, आवश्यक और अनुपातिक होना चाहिए। पत्रकारों को उनके काम के दौरान हिरासत में लेने या उनके साथ बल प्रयोग करने की परिस्थितियों पर पारदर्शी जवाबदेही जरूरी है।
सवाल दिल्ली पुलिस से है: यदि पत्रकार अपनी पहचान बताकर रिपोर्टिंग कर रही थीं, तो उन्हें इस तरह बस में ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी? पुलिस को घटना का पूरा विवरण और हिरासत का आधार सार्वजनिक करना चाहिए।
📌 यह खबर वायरल वीडियो, उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और पत्रकार के आरोपों पर आधारित है। घटना की पूरी परिस्थितियों तथा पुलिस का पक्ष सामने आने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
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