🚨 CCTV फुटेज पर चुनाव आयोग के दावे पर सवाल! RTI में 5 साल के आवेदनों का रिकॉर्ड नहीं मिला

🗳️ नई दिल्ली | चुनावी पारदर्शिता पर बहस
चुनाव आयोग ने दिसंबर 2024 में CCTV फुटेज और चुनावी वीडियो रिकॉर्ड तक सार्वजनिक पहुंच सीमित करने वाले नियमों में बदलाव किया था। अब एक RTI के जवाब में आयोग ने कहा है कि पिछले पांच वर्षों में ऐसे रिकॉर्ड मांगने वाले आवेदनों की संख्या का डेटा उसके पास उपलब्ध नहीं है।
🔍 क्या है पूरा मामला?
▪️ दिसंबर 2024 में चुनाव संचालन नियम, 1961 के नियम 93(2)(a) में संशोधन किया गया।
▪️ नियम बदलने के पक्ष में आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड उपलब्ध कराने में प्रशासनिक संसाधनों और कर्मचारियों की जरूरत का हवाला दिया था। रिकॉर्ड की मांग बढ़ने की बात भी सामने आई थी।
▪️ RTI कार्यकर्ता कन्हैया कुमार ने पिछले पांच वर्षों में मिले आवेदनों, उपलब्ध कराए गए फुटेज और अस्वीकार किए गए अनुरोधों का ब्योरा मांगा।
▪️ 14 सितंबर 2026 के जवाब में आयोग ने कहा कि अनुरोधों की संख्या से जुड़ी सूचना उसके पास किसी भौतिक रूप में उपलब्ध नहीं है।
⚖️ अब उठ रहे हैं ये सवाल
अगर रिकॉर्ड की बढ़ती मांग और प्रशासनिक बोझ नियम बदलने के आधार थे, तो इस आकलन के लिए कौन-से आंकड़े इस्तेमाल किए गए थे? क्या इस फैसले से पहले मांग और संसाधनों का व्यवस्थित आकलन किया गया था?
📌 महत्वपूर्ण: RTI में आंकड़े उपलब्ध न होने से आयोग के फैसले के आधार पर सवाल जरूर उठते हैं, लेकिन इससे जानबूझकर झूठ बोलने का आरोप अपने-आप साबित नहीं होता।
📰 रिपोर्ट: अंकित राज, द वायर हिंदी।
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