इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पेट्रोल पंप की डीलरशिप के लिए जारी आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) के आधार पर जमीन विकसित करने और निर्माण कार्य में खर्च करने वाले आवेदक को राहत दी है। कोर्ट ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड को आदेश दिया है कि वह याची शांतनु सिंह को 15.78 लाख रुपये मुआवजे के रूप में एक महीने में भुगतान करे।

यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन और न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव की खंडपीठ ने दिया है। गाजीपुर में महावीर मंदिर से भदौरा स्टैंड के बीच एसएच-99 पर कंपनी ने पेट्रोल पंप की डीलरशिप के लिए वर्ष 2018 में विज्ञापन जारी कर आवेदन मांगे थे। याची ने आवेदन किया और लॉटरी में चयनित होने के बाद दो अगस्त 2019 को उसे आशय पत्र जारी किया गया। इसमें जमीन को सड़क के स्तर तक विकसित करने,1.5 मीटर ऊंची चहारदीवारी बनाने समेत अन्य शर्तें पूरी करने के लिए कहा गया था।
याची का दावा था कि उसने इन शर्तों को पूरा करने के लिए करीब 15.78 लाख रुपये खर्च किए। संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र भी प्राप्त किए। बाद में कंपनी ने 11 मार्च 2021 को संबंधित स्थान का चयन रद्द कर दिया। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट ने कहा कि आशय पत्र जारी होने के बाद याची ने कंपनी की ओर से निर्धारित शर्तें पूरी करने के लिए निवेश किया था। इसलिए उसे बिना किसी गलती के आर्थिक नुकसान उठाने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता।
