युद्ध में श्रीराम लगातार तीर मारते हैं लेकिन रावण पर प्रभाव नहीं होता है। इस बीच विभीषण ने श्रीराम को रावण की नाभि में अमृत होने से अमरत्व का रहस्य बताया। इसके बाद श्रीराम ने रावण की नाभि में दिव्य तीर मारकर उसका वध किया।
इससे पहले प्रसंगों के अनुसार, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले दहन किए गए। रंग-बिरंगी आतिशबाजी के साथ धूं-धूंकर जला बुराई का चेहरा रावण के पुतले को जलता देख सभी लोगों ने श्रीराम के जयकारे लगाए। उन्होंने सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा ली।
पुतले दहन के साथ 70वें दशहरा मेले का समापन
दशहरा रामलीला धार्मिक सेवा समिति की ओर से विष्णु इंटर कॉलेज के मैदान पर आयोजित 70वां दशहरा मेला मंगलवार को संपन्न हुआ। समिति के महामंत्री रवि छावड़ा ने बताया कि पहले मॉडल टाउन में लगने वाला यह मेला अब विष्णु इंटर कॉलेज मैदान पर होता है। मंगलवार शाम श्रीहरि मंदिर से राजगद्दी यात्रा का शुभारंभ हुआ।

यात्रा सनातन धर्म मंदिर, रामायण मंदिर और दरगाह मंदिर से होते हुए मेला स्थल पहुंची। वहां 50 फुट ऊंचे रावण और 40-40 फुट ऊंचे मेघनाद व कुंभकर्ण के पुतलों का दहन किया गया। इसके बाद शानदार आतिशबाजी मुकाबला हुआ। मेले में खानपान, झूले सहित अन्य सामग्री के स्टॉल लगाए गए थे।




