बरेली। पिछला शिक्षक एमएलसी चुनाव कोरोना महामारी के दौरान हुआ था, पर इस बार ऐसी अड़चन नहीं थी। लिहाजा, बूथ पर पहुंचे मतदाता उत्साहित रहे। महिला मतदाता घर के काम निपटाकर वोट देने पहुंचीं। कैशलेस इलाज, करवाचौथ के अवकाश के मुद्दे पर वोट दिया।

शहर के रिक्खी सिंह इंटर कॉलेज और एमबी इंटर कॉलेज में सर्वाधिक मतदाता थे। महिला और पुरुष मतदाताओं के लिए अलग कतार की व्यवस्था थी। प्रवेश द्वार पर मोबाइल फोन जमा कराने और फोटो आईडी से पर्ची मिलाने के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा था। राजनीतिक दलों के समर्थित प्रत्याशियों के समर्थन में जनप्रतिनिधि, संगठन के पदाधिकारी लगातार केंद्रों का जायजा लेते रहे। आमतौर पर बूथ के बाहर लगे बस्ते पर वोटरों की भीड़ होती है पर एमएलसी चुनाव में कहीं एक, कहीं दो मतदाता तो कहीं सूनापन दिखा। मतदाता बस्ते के बजाय बूथ पर जा रहे थे। ब्यूरो
मतदाता बोले- आश्वासन नहीं, मुद्दों का समाधान जरूरी
शिक्षक हितों की रक्षा, समस्याओं के समाधान के लिए वोट डाला। जिसकी भी जीत हो, वह अपने वादों को पूरा करें। – बृजेश पांडेय
करवाचौथ पर शिक्षिकाओं को अवकाश मिलना चाहिए, ताकि वे धार्मिक रीति-रिवाजों अच्छे से निभा सकें। – सोनिया खंडेलवाल
निर्वाचित प्रत्याशी शिक्षक-शासन के बीच सेतु होते हैं। स्कूलों में शिक्षिकाओं का शोषण रुके, शासन से यही मांग है। – शालिनी वर्मा
देश के विकास में शिक्षक की अहम भूमिका होती है। उनकी समस्याएं दूर हों, इसीलिए वोट डालने आए हैं। – हरिशंकर मौर्य
पूर्व की सरकार में वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय मिलता था। शासन से मांग है कि वह व्यवस्था फिर शुरू हो। – कृपाल सिंह
