करेली में आबकारी सिपाही इमरान अहमद (35) की इलाज के दौरान मौत के मामले में कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने गौस मेडिकेयर सेंटर के संचालक डॉ. फिरोजउद्दीन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। सिपाही के पिता ने आरोप लगाया कि लिवर की बीमारी के इलाज के दौरान बेटे के पेट से पानी निकाला गया था। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई। उसे दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 23 जुलाई 2024 को उसकी मौत हो गई।

एफआईआर के मुताबिक, करेली के करामत की चौकी निवासी अली अहमद सिद्दीकी ने पुलिस को बताया कि बेटा इमरान आबकारी विभाग में कांस्टेबल था। लिवर की बीमारी से पीड़ित होने पर उसे 21 जुलाई 2024 को करेली के गौस मेडिकेयर सेंटर में भर्ती कराया गया था।
इमरान खुद चलकर अस्पताल पहुंचा था। डॉक्टर ने जांच के बाद उसके पेट में पानी भरने की बात कही और पानी निकालने की सलाह देकर उसे ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया।
इसके बाद उसके पेट से पानी निकाला गया। आरोप है कि यह प्रक्रिया किसी पेट या लिवर रोग विशेषज्ञ की सलाह और निगरानी के बिना की गई। प्रक्रिया के तुरंत बाद इमरान की हालत बिगड़ने लगी।
डॉक्टर की सलाह पर उसी रात करीब 9:15 बजे उसे अरोग्यवरम क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती कराया गया। वहां उसे आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा गया लेकिन उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ। 23 जुलाई की सुबह उसकी मौत हो गई।
बेटे की मौत के बाद अली अहमद ने करेली थाने और मुख्य चिकित्सा अधिकारी से शिकायत की। इसके बाद नौ जून 2025 को पुलिस आयुक्त और करेली थानाध्यक्ष को पंजीकृत डाक से प्रार्थना पत्र भेजा लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई। थाना प्रभारी सच्चिदानंद ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर छानबीन की जा रही है।
आरोप-डॉक्टर के पास एमबीबीएस और सर्जन की डिग्री नहीं
पिता ने आरोप लगाया कि गौस मेडिकेयर सेंटर में आईसीयू, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। इसके बावजूद बेटे को अस्पताल में भर्ती किया गया। डॉक्टर के पास एमबीबीएस और सर्जन की डिग्री नहीं है। इलाज में लापरवाही और जरूरी संसाधनों के अभाव को बेटे की मौत हुई है। अस्पताल में भर्ती के दौरान 12,400 रुपये भुगतान किया गया था।







