प्रयागराज :मेडिको-लीगल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अब सीसीटीएनएस पोर्टल पर मिलेगी, प्रक्रिया लगभग पूरी – Medico-legal And Post-mortem Reports Will Now Available On Cctns

इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब मेडिको-लीगल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को सीसीटीएनएस पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेंगी। नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) ने मेडलीपआर पोर्टल को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। अब पुलिस को संबंधित अस्पताल या मोर्चरी में एफआईआर और केस…


इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद अब मेडिको-लीगल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पुलिस को सीसीटीएनएस पोर्टल पर ऑनलाइन उपलब्ध हो सकेंगी। नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) ने मेडलीपआर पोर्टल को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) से जोड़ने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। अब पुलिस को संबंधित अस्पताल या मोर्चरी में एफआईआर और केस क्राइम नंबर के आधार पर रिपोर्ट के लिए अनुरोध भेजना होगा। इसके बाद संबंधित रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड की जा सकेगी।

प्रयागराज की जैरुन्निशा की जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने दोनों पोर्टल को जोड़ने की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए मामला लंबित रखा था। जमानत अर्जी का निस्तारण हो चुका था, लेकिन तकनीकी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए अदालत ने निगरानी जारी रखी।

सुनवाई के दौरान एनआईसी के डिप्टी डायरेक्टर जनरल शशिकांत शर्मा और मेडलीपआर टीम के प्रमुख राहुल जैन ने अदालत को बताया कि पोर्टल एकीकरण का काम पूरा हो चुका है।

एसआरएन अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस प्रभारी डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि प्रयागराज में 15 मई 2025 से 22 अक्तूबर 2026 तक कुल 3707 पोस्टमार्टम हुए, लेकिन पुलिस की ओर से रिपोर्ट के लिए केवल दो मामलों में ही अनुरोध भेजा गया।

तकनीकी दिक्कतें दूर करने के लिए चार नवंबर को बैठक

इस पर एडीजी (टेक्निकल) भगवान एस. श्रीवास्तव ने अदालत को बताया कि पुलिस अधिकारियों को नई व्यवस्था के प्रति जागरूक किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ तकनीकी समस्याओं के कारण अनुरोध भेजने में परेशानी हो रही है। अदालत ने चार नवंबर को सुबह 11 बजे लखनऊ स्थित प्रमुख सचिव, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के कार्यालय में संबंधित अधिकारियों की बैठक बुलाकर समस्याओं का समाधान निकालने और व्यवस्था को प्रभावी बनाने के उपाय तय करने का निर्देश दिया। इसके बाद अदालत ने मामले का निस्तारण कर दिया।



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