हाईकोर्ट :तथ्यों को छिपाकर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं दाखिल करने पर लगा हर्जाना, हाईकोर्ट ने सुनाया फैस – Costs Imposed For Filing Two Habeas Corpus Petitions While Concealing Facts
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
– फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करते हुए एक ही मामले में तथ्यों को छिपाकर दो बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं दाखिल करने पर याची को फटकार लगाई है। कोर्ट ने दोनों याचिकाएं खारिज कर याचिकाकर्ता ओमेंद्र यादव पर 50 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। यह रकम याची को बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य को एक महीने के भीतर अदा करनी होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने दिया है। याचिकाकर्ता ने पहली याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि बरेली पुलिस ने उसे आठ से 13 मई 2026 तक अवैध हिरासत में रखा और बाद में औपचारिक गिरफ्तारी दिखाई। कोर्ट ने पाया कि याचिका में हिरासत में लेने की तारीख, समय और स्थान का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। कोर्ट ने कहा कि हलफनामे के कथन से मुख्य याचिका में ठोस तथ्यों की कमी पूरी नहीं हो सकती।
मामले में गंभीर तथ्य तब सामने आया, जब पता चला कि पहली याचिका में राज्य सरकार की ओर से 18 मई को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के बाद याचिकाकर्ता ने 26 मई को दूसरी याचिका दाखिल कर दी। इसमें पहली याचिका के लंबित होने की जानकारी छिपाई गई। कोर्ट ने कहा कि यदि शुरुआत में ही यह तथ्य सामने आ जाता तो एसएसपी को अदालत की नाराजगी और व्यक्तिगत पेशी का सामना नहीं करना पड़ता। कोर्ट ने एसएसपी को हुई असुविधा को अनुचित बताते हुए खेद जताया। कोर्ट ने प्रत्येक याचिका पर 25 हजार रुपये हर्जाना लगा दिया। कोर्ट ने पाया कि जिस आधार पर गिरफ्तारी मेमो को चुनौती दी गई थी वह निष्प्रभावी हो चुका है। क्योंकि, याची जमानत पर पहले ही रिहा हो चुका है।
