विद्यार्थियों का भविष्य संवारने में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। शिक्षकों को अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए योजनाबद्ध तरीके से पढ़ाई करानी चाहिए। प्रश्नपत्र तैयार करते समय एआई के इस्तेमाल के बजाय शिक्षकों को अपने दिमाग का इस्तेमाल करना होगा। सवाल ऐसे होने चाहिए, जो विद्यार्थियों को रटने के बजाय सोचने और समझने के लिए प्रेरित करें। ये बातें बुधवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहीं। मौका था प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय में आयोजित पूर्वांचल स्टार्टअप संवाद-2026 का।

राज्यपाल ने कहा कि बैक पेपर में विद्यार्थी असफल होते हैं तो इसके लिए केवल विद्यार्थियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। शिक्षकों की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। असफल विद्यार्थियों का प्रदर्शन सामने लाया जाए और जांच में शिक्षक की गलती मिले तो उनका एक महीने का वेतन काटा जाना चाहिए। उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन कर उनकी जांच कराई जाए ताकि मूल्यांकन में पारदर्शिता बनी रहे। प्रश्नपत्र में पाठ्यक्रम से बाहर के सवाल नहीं आने चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में पांच लाख से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। ऐसे में शिक्षकों पर बड़ी जिम्मेदारी है। योजनाबद्ध तरीके से पढ़ाई कराने और विद्यार्थियों की क्षमता के अनुरूप शिक्षण व्यवस्था विकसित करने से ही उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
रज्जू भइया विश्वविद्यालय के फिटनेस स्टूडियो का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां छात्राएं 145 किलोग्राम तक वजन उठा रही हैं। यह बताता है कि बेटियां हर क्षेत्र में अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं। देश का भविष्य और विकास शिक्षकों के हाथ में है।
आगरा के एक विश्वविद्यालय का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां प्रशासनिक भवन का निरीक्षण करने पर उसकी चाबी तक नहीं मिली। इससे विश्वविद्यालयों की व्यवस्थाओं और विद्यार्थियों के भविष्य के प्रति जिम्मेदारी का अंदाजा लगाया जा सकता है। विश्वविद्यालयों को ऐसी कमियों को गंभीरता से लेते हुए सुधार करना चाहिए।
राज्यपाल ने नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर दिया। कहा कि भारत सरकार की ओर से डीडी न्यूज पर इनक्यूबेटरों के लिए एक घंटे की निशुल्क चर्चा प्रसारित की जाती है। इस चर्चा को युवा पीढ़ी को देखना, सुनना और समझना चाहिए ताकि नवाचार के नए विचारों को आगे बढ़ाया जा सके।
विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी अपनी मांगों को लेकर सामने आते हैं तो उनकी समस्याओं को जरूर सुना जाना चाहिए। इसके लिए शिक्षकों और विद्यार्थियों को एक छोटे से कमरे में साथ बैठाकर मंथन किया जाए। उन्होंने दो क्रेडिट का पाठ्यक्रम तैयार करने की बात भी कही। इसके लिए विश्वविद्यालयों में पहले से संचालित पाठ्यक्रमों का उपयोग किया जा सकता है।
