पीलीभीत। पीटीआर में बाघों के संरक्षण और वन प्रबंधन की व्यवस्थाएं कितनी प्रभावी हैं, इसका आकलन करने के लिए कराया गया मैनेजमेंट इफेक्टिवनेस इवैल्यूएशन (एमईई) सर्वे पूरा हो गया है। सर्वे के दौरान जुटाए गए आंकड़ों और विभिन्न मानकों पर हुए मूल्यांकन के आधार पर अब विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। टाइगर रिजर्व प्रशासन निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट तैयार कर राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) को भेजेगा। इसके आधार पर रिजर्व में संरक्षण कार्यों की गुणवत्ता और प्रबंधन की प्रभावशीलता का आकलन होगा।

एनटीसीए के निर्देश पर भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के सहयोग से यह मूल्यांकन कराया गया। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) के संरक्षित क्षेत्र प्रबंधन ढांचे के तहत हुए सर्वे में बाघों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा से लेकर जंगल के प्रबंधन तक के इंतजाम परखे गए।
टीमों ने पैदल गश्त, एम-स्ट्राइप ऐप से निगरानी, वनाग्नि से बचाव और मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों की जमीनी स्थिति का आकलन किया। मूल्यांकन में घास के मैदानों के विकास, वाटर होल्स के रखरखाव, जैव विविधता संरक्षण और इको टूरिज्म से जुड़ी गतिविधियों को भी शामिल किया गया।
संरक्षण के दावों की कसौटी पर परखे जाएंगे इंतजाम
एमईई की रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट होगा कि उपलब्ध बजट और संसाधनों का इस्तेमाल वन्यजीव संरक्षण के लिए किस तरह किया गया और उसका जमीन पर कितना असर पड़ा। रिपोर्ट तैयार होने के बाद इसे एनटीसीए को भेजा जाएगा। प्राधिकरण अपने स्तर से मूल्यांकन के तथ्यों का सत्यापन भी करेगा। ऐसे में रिपोर्ट पीटीआर में बाघ संरक्षण और वन प्रबंधन की वास्तविक स्थिति सामने लाने में अहम होगी।
वर्जन
एमईई के तहत गठित टीमों ने सर्वे और आकलन का कार्य पूरा कर लिया है। अब निर्धारित प्रारूप पर रिपोर्ट तैयार की जा रही है। सभी बिंदुओं का विस्तृत ब्योरा संकलित करने के बाद रिपोर्ट एनटीसीए को भेजी जाएगी। इस प्रक्रिया के माध्यम से पीटीआर में वन्यजीव संरक्षण और प्रबंधन से जुड़ी व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया गया है। – मनीष सिंह, डीएफओ, पीटीआर
