
एक महीने में दो मरीजों की मौत से उठे सवाल,…

पीलीभीत में फैक्टर-8 और 9 की स्थायी व्यवस्था की मांग..

पीलीभीत। हीमोफीलिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए जीवनरक्षक फैक्टर की उपलब्धता का संकट एक बार फिर सामने आया है। समय पर उपचार और आवश्यक फैक्टर उपलब्ध न होने से एक महीने के भीतर दो मरीजों की मौत ने मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है।हीमोफीलिया मरीजों के लिए लंबे समय से आवाज उठा रहीं [नाम] ने बताया कि करीब एक माह पहले मनजीत नाम के मरीज की समय पर उचित उपचार नहीं मिल पाने के कारण मृत्यु हो गई थी। अब 3 अक्टूबर 2026 को गुरमीत नाम के एक अन्य मरीज ने भी दम तोड़ दिया। उनके अनुसार गुरमीत को समय पर फैक्टर-8 उपलब्ध नहीं हो सका, जिसके कारण परिवार को बेहद कठिन परिस्थिति का सामना करना पड़ा।उन्होंने कहा कि इन दोनों मरीजों की मौत ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। उनका कहना है कि हीमोफीलिया मरीजों के लिए फैक्टर कोई सामान्य दवा नहीं, बल्कि कई परिस्थितियों में जीवन बचाने वाला उपचार है। इसके बावजूद मरीजों को समय पर फैक्टर उपलब्ध न होना गंभीर चिंता का विषय है।बरेली में भी फैक्टर की कमी, मरीज परेशानउनके मुताबिक बरेली में भी लंबे समय से फैक्टर की उपलब्धता को लेकर हीमोफीलिया मरीज परेशान हैं। वहीं पीलीभीत में मरीजों को एक विभाग से दूसरे विभाग तक भेजे जाने की शिकायतें सामने आती हैं। उनका कहना है कि जिले में ही फैक्टर की व्यवस्था हो जाए तो मरीजों और उनके परिवारों को उपचार के लिए दूसरे शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।जनप्रतिनिधियों से लगाई गुहार, फिर भी नहीं हुआ समाधानहीमोफीलिया मरीजों की समस्या को लेकर उन्होंने लंबे समय से पीलीभीत जिला अस्पताल में फैक्टर-8 और फैक्टर-9 की व्यवस्था कराने की मांग उठाई है। इस संबंध में उन्होंने मंत्री संजय गंगवार को पत्र लिखकर तथा कई बार व्यक्तिगत रूप से समस्या से अवगत कराया। उनका कहना है कि हर बार कार्रवाई का आश्वासन मिला, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हुआ।उन्होंने जितिन प्रसाद को भी पत्र भेजकर हीमोफीलिया मरीजों की समस्या से अवगत कराया, लेकिन उनके अनुसार अभी तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला।“अपने लिए नहीं, मरीजों की जिंदगी के लिए नेताओं के पास गई”उन्होंने भावुक होकर कहा, “मैं कभी किसी नेता के पास अपना व्यक्तिगत काम लेकर नहीं गई। जो भी काम हुआ, अपने दम पर किया। लेकिन इस बार मैं अपने लिए नहीं, अपने उन मरीजों के लिए गई, जिनकी जिंदगी फैक्टर पर निर्भर है। मनजीत और गुरमीत को खोने का बहुत दुख है। अगर समय पर इलाज और फैक्टर मिल जाता तो शायद हालात कुछ और होते।”उन्होंने जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग से सवाल करते हुए कहा कि जब मरीजों को वोट देने का अधिकार है तो उनकी जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी भी व्यवस्था की होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मरीज एक-एक करके जा रहे हैं और व्यवस्था अभी भी कागजी आश्वासनों तक सीमित है।अब जिला अस्पताल में स्थायी व्यवस्था की मांगउन्होंने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पीलीभीत के जिला अस्पताल में फैक्टर-8 एवं फैक्टर-9 की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही आपात स्थिति में हीमोफीलिया मरीजों को तत्काल फैक्टर उपलब्ध कराने के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज की जान उपचार की अनुपलब्धता के कारण न जाए।मरीजों के परिजनों का कहना है कि बीमारी से लड़ना पहले ही मुश्किल है, लेकिन यदि जीवन बचाने वाला फैक्टर भी समय पर उपलब्ध न हो तो यह संघर्ष और भी भयावह हो जाता है।
