प्रयागराज :एफआईआर रद्द करने के लिए हाईकोर्ट नहीं कर सकता मिनी ट्रायल, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका – High Court Cannot Conduct A ‘mini-trial’ To Quash An Fir; High Court Dismisses The Petition.
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अदालत का फैसला।
– फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आगरा के फतेहाबाद विद्युत वितरण खंड में टेंडर प्रक्रिया में कथित हेराफेरी और 30.44 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले के मामले में एफआईआर रद्द करने की मांग में दायर याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि अदालत मिनी ट्रायल नहीं कर सकती और न ही इस स्तर पर आरोपियों के बचाव का मूल्यांकन कर सकती है। आरोपों की सत्यता जांच का विषय है।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने की है। नीरज पाठक, राजू, रविकांत मिश्रा समेत 17 ने एफआईआर को रद्द करने की मांग में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं पर बिजली कार्याें के टेंडर में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया गया था। जांच रिपोर्ट में राजस्व को 30.44 करोड़ रुपये के नुकसान की बात कही गई थी।
याचियों की ओर से दलील दी गई कि कई आरोपी कर्मचारी लिपिकीय पदों पर कार्यरत थे। उनके पास टेंडर स्वीकृत करने या वित्तीय निर्णय लेने का अधिकार नहीं था। वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि लगाए गए आरोप सही हैं। इसलिए इसकी जांच आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि एफआईआर के साधारण अवलोकन से संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है।
कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के ईआरपी आईडी का इस्तेमाल डाटा भरने, जनरल परचेज ऑर्डर तैयार करने और अनुबंध अपलोड करने में किए जाने का आरोप है। कर्मचारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर काम किया या अपने स्तर पर या उनके आईडी का दुरुपयोग हुआ। यह सभी विवादित तथ्य हैं। इनका निर्धारण जांच के दौरान किया जाना चाहिए। इसी के साथ कोर्ट ने एफआईआर रद्द करने की मांग वाली सभी संबद्ध याचिकाएं खारिज कर दीं।
