काली पट्टी बांध बनाई मानव श्रन्खला,।

लखनऊ। Badi Khabar:प्रदेश मे निजीकरण का विरोध बहुत तेज हो गया है।बिजली को प्राइवेट हाथों मे जाने से रोकने को बिजली कर्मचारी सांगठनों ने कमर कस ली है।
बिजली कर्मचारी संगठनों ने बुधवार को निजीकरण, के विरोध में काला दिवस मनाया। दिनभर बांह पर काली पट्टी बांधकर काम किया। दोपहर में मानव श्रृंखला बनाकर कारपोरेशन प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। शाम को हुई बैठक में निजीकरण रुकने की घोषणा होने तक आंदोलन चलाने का निर्णय लिया।
तय किया गया कि पांच जनवरी को प्रयागराज में बिजली पंचायत होगी।वहीं नए साल के पहले दिन बिजली कर्मचारियों ने उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों के विरोध में पॉवर कारपोरेशन प्रबन्धन और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबन्ध निदेशक व पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबन्ध निदेशक का सामाजिक बहिष्कार ‘किया।
कोई भी बिजली कर्मी इन्हें नए साल की बधाई देने नहीं गया।लखनऊ। पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन से जुड़े बिजली कर्मियों ने बुधवार को दिन भर बांह पर काली पट्टी बांध कर काम किया। शाम को फील्ड हॉस्टल में हुई बैठक में तय किया गया कि किसी भी कीमत पर निजीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पदाधिकारी ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों पर चलकर बिजली कंपनियों को सरकारी क्षेत्र में ही रखना जरूरी है।बैठक में संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के 42 जिलों के निजीकरण से सबसे ज्यादा नुकसान दलित व पिछला वर्ग के लोगों का होगा।
ऐसे में प्रदेश सरकार को आरक्षण को बचाने व जनहित में निजीकरण का फैसला वापस लेकर नई मिशाल कायम करनी चाहिए। आरक्षण को बचाने के लिए करो-मरो की तर्ज पर आंदोलन चलाया जाएगा। क्योंकि प्राइवेट पब्लिक पारनरशिप मॉडल लागू होते ही लगभग 16000 पदों का आरक्षण समाप्त हो जाएगा।
