फर्रुखाबाद। करीब 35 साल तक अदालत में मुकदमे की सुनवाई चली, लेकिन अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर सका। जानलेवा हमला, घर में घुसकर मारपीट और बलवा करने के मुकदमे के वादी और एक अन्य गवाह की मौत हो गई। अदालत में केवल डॉक्टर की गवाही हो सकी। मेडिकल रिपोर्ट में चोटों की पुष्टि हुई, लेकिन यह साबित नहीं हुआ कि चोटें आरोपियों ने ही पहुंचाई थीं। साक्ष्यों की कमी के चलते अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, त्वरित न्यायालय संख्या-01 संजय कुमार की अदालत ने तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

कन्नौज के थाना गुरसहायगंज में वर्ष 1988 में ग्राम सराय दौलत निवासी सत्यप्रकाश गुप्ता ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि प्रधानी के चुनाव की रंजिश में सात जुलाई 1988 की रात आरोपियों ने उनके घर में घुसकर मारपीट की और तमंचे से फायर किया था। इस मामले में जयराम सिंह, अमर सिंह, ओमप्रकाश और सियाराम के खिलाफ मुकदमा चला। विचारण के दौरान ओमप्रकाश की मृत्यु हो गई थी।
अभियोजन पक्ष ने केवल चिकित्सक को गवाह के रूप में पेश किया। डॉक्टर ने सत्यप्रकाश के शरीर पर छह चोटें मिलने की पुष्टि की, लेकिन सभी चोटें साधारण थीं। उन्होंने यह भी बताया कि चोटें गिरने से आ सकती थीं। वादी सत्यप्रकाश और गवाह रामसेवक की मृत्यु के कारण उनकी गवाही नहीं हो सकी। अन्य किसी प्रत्यक्षदर्शी को भी अदालत में पेश नहीं किया गया।
अदालत ने माना कि केवल चोटों की मेडिकल रिपोर्ट से यह साबित नहीं होता कि घटना आरोपियों ने ही की थी। अभियोजन पक्ष आरोपियों की भूमिका और उन पर लगाए गए आरोपों को साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर आरोपी गांव सराय दौलत निवासी जयराम सिंह, अमर सिंह और सियाराम को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।






