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अदालत।
– फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सड़क बनाने और उसके रखरखाव का अनुभव टाउनशिप के आंतरिक विकास कार्यों के अनुभव के बराबर नहीं माना जा सकता। टेंडर में निर्धारित अनुभव संबंधी अनिवार्य शर्तों में मनमाने ढंग से छूट नहीं दी जा सकती। इससे परियोजना की गुणवत्ता और पात्रता के मानक प्रभावित होंगे।
इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने आगरा विकास प्राधिकरण की दो टाउनशिप में आंतरिक विकास कार्यों के लिए जारी टेंडर से जुड़े विवाद को लेकर दाखिल ठेकेदार की याचिका खारिज कर दी।
टेंडर रद्द करने को दी थी चुनौती
आगरा विकास प्राधिकरण ने सिंधुपुरम और यमुनापुरम टाउनशिप में आंतरिक विकास कार्यों के लिए ई-टेंडर जारी किए थे। याची निर्माण कंपनी ने दोनों परियोजनाओं के लिए बोली लगाई। 23 अप्रैल 2026 को तकनीकी बोलियां खुलने पर कंपनी को योग्य माना गया, लेकिन दो दिन बाद अपरिहार्य परिस्थितियों का हवाला देकर दोनों टेंडर रद्द कर नए सिरे से निविदाएं आमंत्रित कर ली गईं।
कंपनी ने आरोप लगाया कि प्राधिकरण ने चुनिंदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर रद्द किए। वित्तीय बोलियां खोलने से पहले ही उनकी जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद नए टेंडर में अन्य ठेकेदारों को काम देने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट जारी कर दिए गए।